Editors Choice

3/recent/post-list

सूरत में चारित्रात्माओं के चातुर्मास

Acharya Tulsi, Acharya Mahapragya, Acharya Mahashraman

तेरापंथ धर्मसंघ से जुड़े आचार्यों, साधु-साध्वियों के सूरत, उधना में हुए अब तक के चातुर्मास

  • सुश्रावक श्री मगनभाई के प्रयासों से सूरत में पहला चातुर्मास सवंत् 1998 में मुनिश्री चम्पालालजी (मीठिया) का हुआ।
  • मुनिश्री सूरजमलजी स्वामी के बाद मुनि श्री कानमलजी स्वामी एवं मुनि श्री घासीरामजी स्वामी का सूरत आगमन हुआ ।
  • मगनभाई की विनती पर श्रद्धेय आचार्यश्री कालुगणी ने संवत् 1989 में मुनि श्री सूरजमलजी स्वामी (भादरा) का चातुर्मास मुम्बई कराया । मुनिश्री खानदेश के रास्ते धुलिया- नासिक होते हुए 22 नवम्बर 1933 को सूरत पधारे व तीन दिन का प्रवास किया। तब तक वखारवाला परिवार व कुछ अन्य परिवार भी तेरापंथ की श्रद्धा स्वीकार कर चुके थे। मुम्बई व सूरत के इन क्षेत्रों में तेरापंथ का प्रचार- प्रसार देखा जा रहा है, इसमें मगनभाई का पुण्य प्रयास ही प्रमुख था ।
  • साधु-साध्वियों की व धर्मसंघ की सेवा में मगनभाई अपना सर्वस्व लगा देते थे। अष्टम आचार्य कालुगणी जब मालवा पधारे थे, तब आपने एक वर्ष में 24 बार आचार्यश्री के दर्शन किये थे। मुनिश्री चम्पालालजी को कोर्ट में उपस्थित करने के प्रयास को, बड़ोदा में बाल दीक्षा के प्रसंग को तथा इसी तरह की अन्यान्य विरोधी चालों को आपने बहुत ही सूझ बूझ के साथ निरस्त किया । शासन की अमूल्य सेवाएं की। आपकी प्रेरणा से गुजरात में तेरापंथ का काफी साहित्य प्रकाशित हुआ और लोगों को धर्मलाभ प्राप्त हुआ ।
  • मुनिश्री सूरजमलजी स्वामी के बाद मुनि श्री कानमलजी स्वामी एवं मुनि श्री घासीरामजी स्वामी का सूरत आगमन हुआ। लेकिन सूरत में पहला चातुर्मास सवंत् 1998 में मुनिश्री चम्पालालजी (मीठिया) का हुआ। मुनिश्री का पहला चातुर्मास बहुत ही उत्तेजक वातावरण में हुआ और विभिन्न प्रकार के घटनाक्रम सामने आये, परन्तु देव, गुरु, धर्म के प्रताप से व मगनभाई जैसे कर्मठ- श्रद्धाशील श्रावक के बुद्धिचातुर्य से धर्म की प्रभावना उत्तरोत्तर बढती ही गयी। उसके बाद तो गुजरात में साधु-साध्वियों के आगमन का द्वार ही खुल गया। स. 1998 से सं, 2067 तक 69 वर्षों में साधु- साध्वियों के 50 चातुर्मास सूरत एवं उधना में हो चुके हैं। सं. 1998 से लेकर सं. 2033 तक 35 वर्षों की समयावधि में मात्र 12 चातुर्मास आयोजित हुए थे, लेकिन उसके बाद के 34 वर्षों में 34 चातुर्मासों का आयोजन इस क्षेत्र के विकास में अहम् भूमिका रखता है।
  • विक्रम संवत 2022 के बाद प्रायः प्रतिवर्ष साधु-साध्वियों के चातुर्मास गुरुदेव की वात्सल्य भरी असीम कृपा से सूरत में होते रहें है। इन वर्षों में तो कई बार दो-दो चातुर्मास भी कराये जा चुके हैं सूरत जिले के बारडोली कस्बे में भी कई चातुर्मास हो चुके हैं। दक्षिण गुजरात मे सूरत के अतिरिक्त बारडोली, उधना, नवसारी आदि ऐसे कई क्षेत्र है जहां प्रतिवर्ष नहीं तो एक दो वर्ष के अंतर से चातुर्मास की अपेक्षा रहती है।
  • सुश्रावक श्री मगनभाई के बाद इस क्षेत्र की सेवा का दायित्व नेमचंद भाई व रूपचंद भाई ने सम्भाला। आचार्य श्री तुलसी ने अपने अल्प प्रवास में ही सम्वत 2024 में यहां दीक्षा महोत्सव का कार्यक्रम प्रदान कर इस क्षेत्र को उपकृत किया

सिटीलाइट

  • आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी एंव युवाचार्य श्री महाश्रमण जी ठाणा- 92 वर्ष 2003
  • साध्वी श्री कनक श्री जी (लाडनूं) ठाणा-5 वर्ष 2004
  • साध्वी विद्यावती जी द्वितीय ठाणा-5 वर्ष 2005
  • साध्वी आनन्द श्री जी ठाणा 4 वर्ष- 2006
  • मुनि श्री धर्मेश कुमार जी ठाणा-3 वर्ष-2007
  • मुनि श्री रविन्द्र कुमार जी ठाणा-3 वर्ष-2008
  • साध्वी श्री सुमनकुमारी जी ठाणा-4 वर्ष-2009
  • साध्वी श्री कंचन प्रभा जी ठाणा-5 वर्ष 2010
  • साध्वी श्री कुंथु श्री जी ठाणा-4 वर्ष- 2011
  • मुनि श्री सुरेश कुमार जी ठाणा-3 वर्ष 2012
  • साध्वी श्री काव्यलता जी ठाणा-4 वर्ष 2013
  • साध्वी श्री सुदर्शना श्री जी ठाणा-4 वर्ष-2014
  • साध्वी श्री साधना श्री जी ठाणा 4 वर्ष-2015
  • साध्वी श्री कैलाशवती जी ठाणा-5 वर्ष-2016
  • साध्वी श्री मधुबाला जी ठाणा-5 वर्ष 2017
  • साध्वी श्री सरस्वती जी ठाणा-5 वर्ष-2018
  • मुनि श्री कमल कुमार जी ठाणा-3 वर्ष 2019
  • साध्वी श्री सरस्वती जी ठाणा 6 वर्ष 2020
  • साध्वी श्री लब्धि श्री जी ठाणा-5 वर्ष-2021
  • मुनि श्री उदित कुमार जी ठाणा-4 वर्ष-2022
  • युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी (अक्षय तृतीया प्रवास) ठाणा- 140 वर्ष-2023
  • साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी ठाणा- 6 वर्ष-2023
  • वर्ष 2023 में दूसरा चातुर्मास आशीर्वाद पैलेस में
  • साध्वी मधुबाला जी (आशीर्वाद पैलेस) ठाणा-4 वर्ष 2023

उधना

  • मुनिश्री पूनमचंदजी (गंगाशहर) ठाणा-3 (वर्ष 1986)
  • साध्वीश्री फूलकुमारीजी (लाउन) ठाणा-5 (वर्ष 1994)
  • मुनिश्री सुमेरमलजी (लाडनूं), मुनिश्री उदित कुमारजी (सरदारशहर) ठाणा-4 (वर्ष 1999)
  • साध्वीश्री यशोधराजी आदि ठाणा-5 (वर्ष 2002)
  • आचार्यश्री महाप्रज्ञजी (टमकोर) युवाचार्यश्री महाश्रमणजी (सरदारशहर), साध्वी प्रमुखाश्री कनकप्रभाजी (लाडनूं) संत 54, सतियाँ 44, समण समणीवृंद (मंगल चातुमसिक प्रवेश से पूर्व (दि. 16 जून से 2 जुलाई 2003) तक 16 दिवसीय प्रवास
  • समणी डॉ. स्थित प्रज्ञाजी- ठाणा-3 (वर्ष 2004)
  • समणी डॉ. सत्यप्रज्ञाजी ठाणा-3 (वर्ष 2005)
  • मुनिश्री संजयकुमारजी (दिवेर), मुनिश्री प्रसन्नकुमारजी (दिवेर) ठाणा-5 (वर्ष 2006)
  • साध्वीश्री आनन्दश्रीजी (गंगाशहर) ठाणा-4 (वर्ष 2007)
  • साध्वीश्री संगीतश्रीजी (श्रीडूंगरगढ़) ठाण-4 (वर्ष 2008)
  • समणी ज्योतिप्रज्ञाजी आदि समणी-4 (वर्ष 2009)
  • साध्वी श्री कंचनप्रभाजी (सुजानगढ़) द्विमासिक प्रवास ठाणा-5 (वर्ष 2010)
  • मुनिश्री भूपेन्द्रकुमारजी (लाडनू) ठाणा-2 (वर्ष 2012)
  • मुनि श्री सुव्रतकुमारजी (बीदासर) ठाणा-4 (वर्ष 2014)
  • साध्वीश्री कैलाशवतीजी (सिसाय-हरियाणा) ठाणा-5 (वर्ष 2015)
  • साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी (श्रीडूंगरगढ़) ठाणा-6 (वर्ष 2016)
  • साध्वीश्री सोमलताजी (गंगाशहर) ठाणा-5 (वर्ष- 2017)
  • साध्वीश्री ललितप्रभाजी (सरदारशहर) ठाणा-4 (वर्ष- 2018)
  • साध्वीश्री सरस्वतीजी (हांसी- हरियाणा) ठाणा-7 (वर्ष 2019)
  • साध्वीश्री सम्यक्प्रभाजी (सरदारशहर) ठाणा-6 (वर्ष 2020)
  • मुनिश्री सुव्रतकुमारजी (बीदासर) ठाणा-3 (वर्ष 2021)
  • साध्वीश्री लब्धिश्रीजी (अहमदाबाद) ठाणा-5 (वर्ष 2022)
  • एकदशमाधिशास्ता युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी (सरदारशहर), साध्वी प्रमुखाश्री विश्रुतविभाजी (लाडनूं), मुख्य मुनिश्री महावीरकुमारजी (फलसूंड), साध्वीवर्या संबुद्धयशाजी (जसोल), संत 54, सतियां 86. समणीवृंद 26
  • 14 वा पटोत्सव एवं त्रिदिवसीय पावस प्रवास (दिनांक 30 अप्रेल 1 मई एवं 2 मई 2023)
  • मुनिश्री उदितकुमारजी (सरदारशहर) ठाणा-4 (वर्ष-2023)
साभार: सूरत में तेरापंथ उद्भव और विकास पुस्तक से संकलित

Post a Comment

0 Comments