Editors Choice

3/recent/post-list

ऐतिहासिक रहा वर्ष 2003 में आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का सूरत चातुर्मास

Acharya Mahaprabhu with APJ Abdul Kalam in Surat 2003

सन् 1999 का आचार्यश्री महाप्रज्ञजी का पावस-प्रवास महरौली-दिल्ली में था। सूरत से एक हजार श्रावक-श्राविकाओं का वृहत् संघ विकास महोत्सव के अवसर पर स्पेशल ट्रेन से दिल्ली गया था। उस वर्ष सूरत में मुनिश्री सुमेरमलजी 'लाडनूं का चातुर्मास था। मुनिश्री की प्रेरणा से सूरत-उधना से बड़ी संख्या में लोग पूज्यप्रवर को सूरत चातुर्मास के लिए प्रार्थना करने गये थे। उससे पहले 23 अगस्त को सूरत के अनेक वरिष्ठ श्रावकों ने गुजरात यात्रा एवं सूरत चातुर्मास करने का विशेष अनुरोध किया था। श्री शैलेषभाई झवेरी, श्री शोभालालजी राठौड़, श्री लक्ष्मीलालजी बाफना, श्री जसकरणजी चौपड़ा, श्री चंपकभाई मेहता आदि ने सुरत- चातुर्मास करने का आवाहन करते हुए निवेदन किया- आगामी विकास महोत्सव पर स्पेशल ट्रेन द्वारा सूरत से एक हजार व्यक्ति इस अनुरोध के साथ उपस्थित होने वाले हैं। विनम्र निवेदन है आप हमारी भावना को पूरा करेंगे।

पदाभिषेक का भव्य आयोजन एवं यात्राओं की घोषणा 18 सितम्बर 1999 को

पदाभिषेक कार्यक्रम के अन्तर्गत सूरत के युवकों ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। साध्वीश्री वन्दनाश्रीजी, श्री चम्पकभाई मेहता आदि ने दक्षिण गुजरात की यात्रा एवं सूरत चातुर्मास के लिए विशेष अनुरोध किया। आचार्य प्रवर ने अपनी आगामी यात्राओं की घोषणा करते हुए फरमाया द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव और परिस्थिति की अनुकूलता के साथ इस यात्रा का संकल्प करते हैं। गुरुदेव की घोषणा से यह तो स्पष्ट था कि सन् 2002 का चातुर्मास गुजरात में होगा लेकिन स्थान की घोषणा नहीं की गई थी। सन् 2000-का पूज्यप्रवर का चातुर्मास लाडनूं में था। पहले से ही आचार्य प्रवर ने घोषित कर दिया था कि विकास महोत्सव के अवसर पर गुजरात चातुर्मास की घोषणा करनी है। कुछ दिन पूर्व ही पूज्य प्रवर ने सहज विनोद भाव के साथ फरमाया था कि उस दिन दंगल होने वाला है। गुजरात चातुर्मास के लिए दो उम्मीदवार थे। अहमदाबाद और सूरत। दोनों ही क्षेत्र चाहते वे कि चातुर्मास उनको ही प्राप्त हो। अतः उस दिन बहुत बड़ी संख्या में लोग पहुंचने वाले हैं। दोनों ही बड़े क्षेत्र चातुर्मास के लिए अपना अपना निवेदन करेंगे।

सूरत तो खरबूजे की तरह है

उस दिन सुरत और अहमदाबाद दोनों ही स्थानों से काफी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं लाडनूं पहुंच गये। प्रातः कालीन प्रवचन में दोनों ही क्षेत्रों में विनम्रतापूर्वक अपने-अपने क्षेत्र में पावस-प्रवास के लिए जोरदार शब्दो में अपना पक्ष प्रस्तुत किया। सूरत की तरफ से वरिष्ठ श्रावक श्री रुपचंदजी सेठिया में अपने वक्तव्य में निवेदन किया गुरुदेव दो फल होते हैं, एक सन्तरा और दूसरा खरबूजा। सन्तरा ऊपर से एकाकार होता है लेकिन छिलका निकालने के बाद उसकी कली-कली अलग हो जाती है। खरबूजे के उपर धारियां अंकित रहती है लेकिन काटने के है, बाद देखते है कि पूरा खरबूजा एकाकार कहीं से भी विभक्त नहीं दिखता है। सूरत तो खरबूजे की तरह है। ऊपर की धारियां थली, मेवाड़, मारवाड़, वाव, हरियाणा आदि प्रदेशों का संकेत करती हैं लेकिन अन्तरंग स्थिति में पूरा समाज एकाकार है, किंचित भी विभक्त नहीं है सूरत का पूरा तेरापंथी समाज अपनी श्रद्धा, निष्ठा, सेवा, समन्वय एवं समर्पण भावना के लिए विख्यात है।

श्री रूपचन्दजीने आगे कहा-

गुरुदेव। दिल्ली में सूरत के लोगों की प्रार्थना के बाद आपने गुजरात चातुर्मास की घोषणा करवाई थी। आज हमारा बड़ा भाई- अहमदाबाद हमारा अधिकार छीन लेने के लिए आ गया है। आचार्य प्रवर इस चातुर्मास पर पूरा अधिकार हमारा है। अतः आप कृपा कर के श्रीमुख से सूरत चातुर्मास की घोषणा करवायें। पूज्यप्रवर ने प्रमुदित मन से दोनों की बातें सुनी। एक साथ अहमदाबाद एवं सूरत दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अगल चातुर्मासों की घोषणा करवा दी। सुधर्मा सभा का प्रागंण ओम-अर्हम के जय नादों से गूंजने लगा। वर्ष 2002 का अहमदाबाद चातुमार्स सम्पन्न करने के बाद उस वर्ष का मर्यादा महोत्सव आयोजित करने का सौभाग्य मुम्बई को प्राप्त हुआ। उसके बाद पूज्यवर अपनी धवल सेना के साथ वर्ष 2003 के चातुर्मास के लिए सूरत पधारे। मुम्बई मर्यादा महोत्सव की सम्पन्नता के पश्चात पूज्यवर ने 28 मई 2003 को महाराष्ट्र राज्य की सीमा छोड़ कर गुजरात की धरती को अपने चरण स्पर्श से पावन किया। गुजरात प्रवेश के समय नन्दीग्राम में सूरत, उधना, वापी, भिलाड, व दक्षिण गुजरात के अनेक स्थानों के लोग पलक-पावडे बिछाये आपका स्वागत करने के लिए उपस्थित थे।

राज्य-अतिथि

गुजरात सरकार ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ को 'राज्य अतिथि के रूप में स्वीकृत कर विशेष सम्मान प्रदान किया। गुजरात सरकार के सचिवालय ने सूरत के उन्थ प्रसासनिक अधिकारियों को पत्र प्रेषित कर उचित निर्देश प्रदान किये।

Post a Comment

0 Comments