Editors Choice

3/recent/post-list

बुरी संगति से बचने का प्रयास करे मानव : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

आचार्यश्री ने साधु की संगति अथवा अच्छी संगति करने दी पावन प्रेरणा

तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा 5वें प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन का समायोजन 

प्रशासनिक जीवन में रहे धर्म का प्रभाव : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

28.09.2024, शनिवार, वेसु, सूरत (गुजरात) :


जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने ‘आयारो’ आगम के माध्यम से महावीर समवसरण में शनिवार को उपस्थित जनसमूह को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जैन धर्म के अंग आगमों में सबसे पहला अंग आगम है आयारो। इसके सूत्रों के माध्यम से अनेक प्रकार की प्रेरणाएं व जानकारियां प्राप्त हो सकती हैं। जैन शासन के श्वेताम्बर परंपरा के साहित्य में आगम वाङ्मय का बहुत ऊंचा स्थान है। आयारो बताया गया है कि बाल, अविरत, अज्ञानी, हिंसा में प्रवृत्त रहने वाले व्यक्ति के संगत में नहीं रहना चाहिए। 

मानव जीवन में संगति का प्रभाव भी पड़ सकता है। आदमी किसके साथ उठता-बैठता है, उसकी संगति किसके साथ है, इसका बड़ा महत्त्व होता है। साधुओं के दर्शन से ही पुण्य होते हैं। अहिंसा मूर्ति, क्षमामूर्ति, त्यागमूर्ति, तपोमूर्ति साधु होते हैं, जो साधु तन, मन व वचन से किसी को दुःख नहीं देते, ऐसे साधुओं के दर्शन करने मात्र से भी पाप झड़ता है, आत्मा निर्मल बन सकती है। साधुओं की थोड़े समय संगति भी प्रेरणा देने वाली बन सकती है। हमेशा साधु न मिलें तो भी गृहस्थ जीवन में भी अच्छे विचारवान, ज्ञानी के साथ संगति हो तो उससे भी अच्छी प्रेरणा प्राप्त हो सकती है। संगति मनुष्य की भी होती है और संगति साहित्य की भी होती है। साहित्यों के पठन से भी अच्छे विचार, अच्छा ज्ञान, अच्छी खुराक और अच्छी प्रेरणा मिल सकती है। अच्छे साहित्य को पढ़ने का प्रयास करना चाहिए। आंख और कान रूपी इन्द्रियों से बाह्य जगत अच्छा सम्पर्क होता है। ये दोनों इन्द्रियां बाह्य जगत से जुड़ने के सशक्त माध्यम हैं। कान से अच्छे गीतों का श्रवण करें तो अच्छे भाव से मन प्रकंपित हो सकते हैं। शुद्ध साधु के दर्शन से भी आदमी को लाभ प्राप्त हो सकता है। 

गलत संगत से जीवन पर गलत प्रभाव पड़ता है। गाली देने वाले, बुरे विचार रखने वालों से मन में बुरे विचार और जुबान पर भी गलत प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए आदमी को बाल, अज्ञानी, अपराधी और हिंसा से प्रवृत्त आदमी की संगति से बचने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थी जगत के लिए भी एक संदेश देने वाला है कि विद्यार्थी भी अपने जीवन में अच्छी संगति करने का प्रयास करें तो जीवन में अच्छाईयों का विकास हो सकता है।

Post a Comment

0 Comments