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जैन विश्व भारती का द्विदिवसीय वार्षिक अधिवेशन

26.09.24, सूरत। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में जैन विश्व भारती का द्विदिवसीय वार्षिक अधिवेशन का आज मंचीय उपक्रम भी था। इस क्रम में जैन विश्व भारती के अध्यक्ष श्री अमरचंद लुंकड़ ने अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए गत दो वर्ष में हुए जैन विश्व भारती के गति-प्रगति का विवरण वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत किया। जैन विश्व भारती के मंत्री श्री सलिल लोढ़ा ने अपनी अभिव्यक्ति दी। जैन विश्व भारती के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि कीर्तिकुमारजी ने अपनी विचाराभिव्यक्ति दी।  


इस अवसर पर शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ से संबद्ध विविध संस्थाएं हैं, उनमें एक है जैन विश्व भारती। इस संस्था का जन्म आचार्यश्री तुलसी के समय हुआ था। यह संस्था अपनी शताब्दी के उत्तर्राध में चल रही है। इस संस्था ने विकास किया है। कई बार भौतिक सहयोग आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए आवश्यक होता है। गुरुदेव तुलसी तो वहां लगातार दो-दो चतुर्मास करते थे। इसमें मान्य विश्वविद्यालय विकसित हुआ है। वहां एक आश्रम का-सा रूप है। वहां योगक्षेम वर्ष का आयोजन हुआ था। आचार्यश्री तुलसी ने जैन विश्व भारती को कामधेनु कहा था। शिक्षा, शोध, साधना, साहित्य आदि गतिविधियां खूब आगे बढ़ती रहें। मैंने तो वहां योगक्षेम वर्ष का निर्धारण भी कर दिया है। खूब अच्छा विकास होता रहे। आचार्यश्री के मंगल आशीर्वचन के उपरान्त साध्वी स्तुतिप्रभाजी ने गीत का संगान किया। 




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