03.08.24, सूरत। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा द्वारा स्नेह, संस्कार व समन्वय के रूप में प्रारम्भ किए गए प्रकल्प ‘बेटी तेरापंथ की’ का द्वितीय सम्मेलन का शुभारम्भ भी हुआ। अपने आध्यात्मिक मायके पहुंचने वाली बेटियों का उत्साह मानों अपने चरम पर था। 1100 से अधिक बेटियां तो साथ ही 450 से अधिक दामाद भी संभागी बनने के लिए चतुर्मास प्रवास स्थल में पहुंच गए। बेटियों की चहक से पूरा चतुर्मास परिसर चहचहा रहा था।
इस संदर्भ में इसकी संयोजक श्रीमती कुमुद कच्छारा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। सूरत शहर से जुड़ी हुई तेरापंथी बेटियों ने गीत को प्रस्तुति दी। तदुपरान्त सह संयोजिका श्रीमती वंदना बरड़िया ने समन्वयक बेटियों के साथ भावनाओं को प्रस्तुति दी।


युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आध्यात्मिक मायके में पहुंची तेरापंथी बेटियों को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि साधु सांसारिक संयोगों से मुक्त होता है। यह संबंधातीत जीवन है। गृहस्थ जीवन में परिवार की शादी आदि-आदि कार्यक्रमों के लिए कहां से कहां जाना होता है। आज ‘बेटी तेरापंथ की’ सम्मेलन हो रहा है। यह कार्यक्रम संबंधों वाला है। मुझे जानकारी मिली कि बेटियों के साथ दामाद भी आए हैं, बहुत अच्छी बात है। बेटियां अपने परिवार में अच्छे संस्कार के साथ रहें। अपने बच्चों का अच्छे धार्मिक संस्कारों का सिंचन करने का प्रयास करें। परिवार नशामुक्त हो। महासभा के तत्त्वावधान में यह प्रकल्प सामने है। बेटी के साथ दामाद का भी ससुराल पक्ष से एक विशेष संबंध होता है। दामाद लोग भी परिवार में शांति रहे, बच्चों में अच्छे संस्कार हो। जीवन नशामुक्त रहे। महासभा का यह क्रम धार्मिक दृष्टि व सामाजिक दृष्टि से निष्पत्तिकारक बने, मंगलकामना।
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