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कन्या मण्डल अधिवेशन में आचार्यश्री ने दिया पावन पाथेय

श्री, लज्जा, धैर्य, कीर्ति, बुद्धि और लक्ष्मी रूपी गुणों से युक्त हों कन्याएं : आचार्यश्री महाश्रमण

-20 वें कन्या मण्डल अधिवेशन में कन्याओं को साध्वीप्रमुखाजी ने दी मंगल प्रेरणा 

28.08.2024, बुधवार, वेसु, सूरत (गुजरात) :



परम पूज्य आचार्यप्रवर की मंगल सन्निधि तथा अखिल भारतीय तेरापंच महिला मण्डल के तत्त्वावधान में आयोजित तेरापंथ कन्या मण्डल के द्विदिवसीय सम्मेलन में ७३ क्षेत्रों से करीब ५०० कन्याएं संभागी बनीं। तेरापंथ कन्या मण्डल के प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले सम्मेलन (अधिवेशन) को इस वर्ष चार चरणों में आयोजित किया गया। इस चतुर्थ चरण में महाराष्ट्र, मेवाड़, छत्तीसगढ़, उडिशा, मध्यप्रदेश व गुजरात की कन्याएं संभागी बनीं। इससे पूर्व तीन चरण अन्य अंचलों में समायोजित हो चुके हैं। 'ज्योतिर्मय' थीम पर आधारित इस सम्मेलन की संभागी कन्याओं को परम पूज्य आचार्यप्रवर का मंगल पाथेय प्राप्त हुआ। आचार्यप्रवर ने कन्याओं की जिज्ञासाओं के उत्तर भी प्रदान किए, जो उनके जीवन की निधि बन गए। विभिन्न सत्रों में साध्वीप्रमुखाजी और साध्वीवर्याजी ने भी कन्याओं को उद्बोधित किया। सम्मेलन के दौरान साध्वी वंदनाश्रीजी, साध्वी राजश्रीजी, साध्वी विशालप्रभाजी, साध्वी ख्यातयशाजी, साध्वी प्रांजलयशानी, साध्वी सिद्धांतप्रभाजी, साध्वी कल्पयशाजी व साध्धी कमनीयप्रभाजी के भी वक्तव्य हुए। पूर्व आइ.ए.एस. ऑफिसर 'तथास्तु' कोचिंग क्लासेस की संस्थापक डॉ. तनु जैन से भी संभागियों को प्रशिक्षण प्राप्त हुआ।

28 अगस्त को मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान अधिवेशन का मंचीय उपक्रम रहा। अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती सरिता डागा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ कन्या मण्डल की प्रभारी श्रीमती अदिति सेखानी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। तेरापंथ कन्या मण्डल-सूरत ने अपनी प्रस्तुति दी। उपस्थित कन्याओं ने चौबीसी के गीत का संगान किया। 

तदुपरान्त साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभाजी ने उपस्थित कन्याओं को मंगल अभिप्रेरणा देते हुए कन्याओं को जीवन ज्योतित करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। युगप्रधान आचार्यश्री ने अधिवेशन में उपस्थित कन्याओं को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि मनुष्य एक विकसित प्राणी होता है और वह जो उत्कृष्ट साधना कर सकता है, अन्य कोई प्राणी साधना नहीं कर सकता। कन्या मण्डल का यह अधिवेशन अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मण्डल के अंतर्गत हो रहा है। कन्याओं में श्री, लज्जा, धैर्य, कीर्ति, बुद्धि और लक्ष्मी रूपी विशेषणों का विकास होता रहे। इन छह देवी रूपों कन्याएं अच्छा विकास करें। कन्याएं अच्छी श्राविकाएं बनें और अच्छे धार्मिक-आध्यात्मिक कार्य करती रहें और स्वयं के विकास का प्रयास करती रहें। 






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