27.07.24, सूरत। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह का भी आयोजन हुआ। द्विदिवसीय मेधावी छात्र सम्मान समारोह में करीब 204 विद्यार्थी संभागी बने।
इस प्रसंग में पूज्यप्रवर ने कहा- 'हमारे जीवन में एक ओर शिक्षा का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है तो दूसरी और हमारे जीवन में भावशुद्धि और आचरणशुद्धि का भी बड़ा महत्त्व है। गृहस्थों के जीवन में व्यापार, धंधे, पैसों का भी अपना महत्त्व है। समाज में प्रतिष्ठा कैसी है- - गृहस्थों के लिए यह एक चिंतन का विषय भी बन सकता है। भावशुद्धि और आचरणशुद्धि नितांत आध्यात्मिक पक्ष होता है। शिक्षा भी जीवन का एक बहुत महत्त्वपूर्ण आयाम है। ज्ञान के बिना एक प्रकार का अंधेरा रहता है। ज्ञान भी दो प्रकार का होता है भीतर से उठने वाला और बाहर से प्राप्त होने वाला। एक कुएं का पानी होता है और दूसरा कुण्ड का पानी है। कुण्ड में जो पानी डाला गया है, उसे काम में लिया जा सकता है। कुएं में भीतर से पानी आता है। इसी प्रकार ज्ञान भी दो प्रकार का होता है, बाहर से प्राप्त ज्ञान और प्रज्ञा से प्राप्त ज्ञान, अतीन्द्रिय ज्ञान।
आज मेधावी सम्मान समारोह का प्रसंग है। मेधावी बनना भी जीवन की एक छोटी-सी उपलब्धि होती है। विद्यार्थी तो बहुत हो सकते हैं, किन्तु सारे विद्यार्थी मेधावी हों, यह कहना कठिन है। एक क्लास में पचास विद्यार्थी पढ़ते हैं तो उनमें हो सकता है कि कुछ ही विद्यार्थी मेधावी हों। तेरापंथ समाज के जो विद्यार्थी हैं, उन्हें विकास का अच्छा रास्ता मिले, उनमें अच्छा संकल्प रहे। संकल्प से सफलता मिल सकती है, सफलता को प्राप्त करने के लिए संकल्प के बाद सत्पुरुषार्थ करना चाहिए। किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए पहले संकल्प होना चाहिए। फिर उस दिशा में गति हो तो मंजिल भी प्राप्त हो सकती है।
मेधावी छात्र-छात्राओं में भावों और आचरणों की शुद्धि भी रहनी चाहिए। इनकी मेथा का अच्छा उपयोग होता रहे। ये अपनी प्रतिभा, ज्ञान का दूसरों की समस्या के समाधान में भी उपयोग करते रहें। मेधा समस्या को पैदा करने वाली न बने, वह समस्या समाधायक बने, यह काम्य है। जीवन में धार्मिकता का प्रभाव रहे। सामान्यतया प्रतिदिन कम से कम इक्कीस बार नमस्कार महामंत्र का जप हो। ड्रग्स, शराब, सिगरेट आदि नशीली वस्तुओं से बचे रहने का लक्ष्य हो। विद्यालयी अध्ययन के अलावा यदि समय मिले तो जैन विश्व भारती के समण संस्कृति संकाय के द्वारा संचालित जैन विद्या पाठ्यक्रम से भी यथानुकूलता, यथावसर जुड़ाव हो सकता है। मेधावी छात्र-छात्राएं अपने जीवन में धार्मिकता, आध्यात्मिकता का भी विकास करने का प्रयास करते रहें। मंगलकामना।'
तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पंकज ओस्तवाल, ट्रस्टी श्री संजय जैन और एजुकेशन कमेटी की चेयरमेन डॉ. वंदना डांगी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।
'संकल्प से सफलता' विषय पर आधारित इस सम्मेलन में विभिन्न सत्रों में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि रजनीशकुमारजी, मुनि सिद्धकुमारजी, साध्वी समताप्रभाजी तथा मेधावी छात्र सम्मान समारोह के संयोजक श्री मनोज चौपड़ा के भी वक्तव्य हुए।

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