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TPF द्वारा डॉक्टर सम्मेलन का आयोजन

27.07.24, सूरत। परम श्रद्धेय आचार्यप्रवर की पावन सन्निधि में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा आयोजित ८ वें राष्ट्रीय डॉक्टर्स अधिवेशन में लगभग २२ क्षेत्रों के करीब १०८ डॉक्टर्स संभागी बने।

परम पूज्य आचार्यप्रवर की सन्निधि में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा आयोजित द्विदिवसीय डॉक्टर्स सम्मेलन के संदर्भ में मंचीय उपक्रम भी रहा। इस संदर्भ में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के मेडिकल सेल के कन्वेनर डॉ. कपिल सिसोदिया व डॉ. निर्मल चोरड़िया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। परम श्रद्धेय आचार्यप्रवर ने इस अवसर पर अपने मंगल उद्बोधन में कहा- डॉक्टर्स सम्मेलन का प्रसंग है। डॉक्टर का कर्त्तव्य होता है कि मरीज को कैसे स्वस्थ बनाया जाए। डॉक्टर प्रयास करते हैं और कितने मरीज बीमारियों से काफी छुटकारा पा लेते हैं, यह डॉक्टर्स की मानों सफलता हो जाती है, किन्तु आखिर मृत्यु निश्चित है। कई-कई डॉक्टर्स विशेष ज्ञानी हो सकते हैं, लेकिन मौत से हमेशा के लिए बचा लेना उनके लिए भी हाथ की बात नहीं होती। कोई-कोई बीमारी भी लाइलाज हो जाती है तो डॉक्टर्स भी कह देते हैं कि अब ले जाओ, सेवा करो।

शारीरिक बीमारी भी होती है और मानसिक बीमारी भी होती है। शरीर के स्वास्थ्य का महत्त्व है तो मन के स्वास्थ्य का भी अपना महत्त्व है। शारीरिक स्वास्थ्य में कुछ कठिनाई भी है, किन्तु मनोबल अच्छा है, मन प्रसन्न है तो थोड़ी-बहुत तकलीफ होने पर भी आदमी परेशान नहीं होता। मन अशांत हो जाए तो थोड़ी तकलीफ भी ज्यादा परेशान करने वाली हो सकती है। मन की बीमारी तन की बीमारी का कारण भी बन सकती है, किन्तु मन भी मूल नहीं है, मूल है भावात्मक बीमारी।

भावात्मक बीमारी की चिकित्सा अध्यात्म के द्वारा की जा सकती है। स्वास्थ्य के संदर्भ में जीवनशैली भी महत्त्वपूर्ण है और उसके साथ आध्यात्मिकता भी महत्त्वपूर्ण होती है। पुराने पापकर्म कट जाते हैं तो बीमारियां दूर हो सकती हैं, दूर रह सकती हैं। कभी बीमारी हो भी जाए तो भी मन में शांति रहनी चाहिए, आध्यात्मिक दृष्टिकोण बना रहना चाहिए। दृष्टिकोण आध्यात्मिक रहता है तो बीमारी भी कम परेशान करने वाली बन सकती है।

मरीज के लिए डॉक्टर्स महत्त्वपूर्ण व्यक्ति होते हैं। डॉक्टर का ज्ञान अच्छा होता है, उसमें और चिकित्सकीय निपुणता होती है तो वह मरीज को स्वस्थ भी बना सकता है। डॉक्टर किस जाति का है, किस धर्म को मानने वाला है, ये बातें गौण हैं, मरीज को तो अच्छा इलाज करने वाला डॉक्टर चाहिए। डॉक्टर का कर्त्तव्य इलाज करना है। उसके साथ आध्यात्मिकता को भी जितना जोड़ सकें, ताकि आदमी बीमार होने पर भी मनोबल और शांति में रह सके। डॉक्टर्स का यह सम्मेलन निष्पत्तिपूर्ण हो। मंगलकामना।'

 'होलिस्टिक हीलिंग' विषय पर आधारित इस द्विदिवसीय सम्मेलन में मुनि उदितकुमारजी, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि रजनीशकुमारजी और साध्वी वीरप्रभाजी के भी वक्तव्य हुए। डॉ. धवल डोसी, डॉ. धीरज मरोठी, डॉ. अपूर्वा वसावड़ा, डॉ. देसाई, डॉ. पवन बेंगानी, डॉ. सिद्धार्थ जैन, डॉ. सौरभ समदरिया और तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के सहमंत्री श्री मनोज जैन ने भी अपनी अभिव्यक्ति दी।



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