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अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का दूसरा दिन अहिंसा दिवस

अहिंसा भगवती सभी प्राणियों के लिए कल्याणकारी : अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमण

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का दूसरा दिन अहिंसा दिवस के रूप में हुआ समायोजित 

आचार्यश्री ने शब्द और स्पर्श को सहन करने दी पावन प्रेरणा

02.10.2024, बुधवार, वेसु, सूरत (गुजरात) :


जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का शुभारम्भ हो चुका है। इस सप्ताह के दूसरे दिन अर्थात् बुधवार को अहिंसा दिवस के रूप में समायोजित किया गया। महावीर समवसरण में उपस्थित जनता को अहिंसा यात्रास के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने आयारो आगम के माध्यम से प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि अनासक्त साधक शब्द और स्पर्श को सहन करता है। सहिष्णुता मानवता का एक गुण है और वह साधना भी होती है। मन अथवा शरीर के विपरित स्थिति आने पर भी सम भाव रखते हुए उसे सहन कर लेना एक अच्छी साधना होती है। शब्द भी कई बार ऐसे आते हैं, जो कटु होते हैं, अपमानकारक होते हैं। साधु को भी कटु शब्द सुनने को मिल सकते हैं। वहां साधु को शब्दों को सहन करने का प्रयास करना चाहिए। 

जीवन में बातचीत का काम पड़ता रहता है। बातचीत में कटु शब्द भी प्रयोग हो सकता है, हो सकता है कोई झूठा आरोप भी लगा सकता है। साधु को वैसे शब्दों और उसे सहने का प्रयास करना चाहिए। 

आज दो अक्टूबर है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का दूसरा दिन अहिंसा दिवस के रूप में समायोजित है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का यह सात दिन अणुव्रत के प्रचार-प्रसार की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। अणुव्रत से जुड़ी हुई संस्थाएं अहिंसा, नैतिकता व नशामुक्ति का यथासंभव प्रचार-प्रसार करती रहें। आदमी यह प्रयास करे कि उसके जीवन में अहिंसा का प्रभाव बना रहे। आदमी की भाषा में, विचार में, व्यवहार में अहिंसा का भाव बना रहे। आज का दिन महात्मा गांधी से भी जुड़ा हुआ है। अहिंसा एक प्रकार की भगवती है, माता है, जीवनदाता है। अहिंसा मानों सभी प्राणियों को अभय बना देती है। अहिंसा शौर्य, वीर्य और बलवती हो, इसका प्रयास करना चाहिए। 

मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने नवरात्र में नौ दिनों होने वाले आध्यात्मिक अनुष्ठान की जानकारी देने के उपरान्त प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष के संदर्भ में उपस्थित जनता को प्रेक्षाध्यान का प्रयोग भी कराया। ‘सादर स्मरण शासनमाता भाग-2’ शासनश्री साध्वी कल्पलताजी द्वारा लिखित पुस्तक को जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों द्वारा आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में पावन आशीर्वाद प्रदान किया। मुनि उदितकुमारजी ने आयम्बिल अनुष्ठान के विषय में जानकारी दी। अहिंसा दिवस के संदर्भ में सूरत के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। मुम्बई के घाटकोपर उपाश्रय के ट्रस्टी श्री मुकेशभाई ने अपनी अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया।   

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