जैनम् जयतु शासनम्’ में उपस्थित सकल जैन महिलाओं को मिला शांतिदूत से मंगल आशीर्वाद
22.10.2024, मंगलवार, वेसु, सूरत (गुजरात)
तेरापंथ महिला मण्डल-सूरत द्वारा आयोजित ‘जैनम् जयतु शासनम्’ कार्यक्रम के तहत सकल जैन महिला सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस संदर्भ में तेरापंथ महिला मण्डल-सूरत की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती मधु देरासरिया ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।
युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने इस संदर्भ पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि शासन के नायक तीर्थंकर होते हैं। भगवान महावीर इस अवसर्पिणी काल के अंतिम चौबीसवें तीर्थंकर हुए। चार तीर्थ साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका। साधु-साध्वी तो वंदनीय पूजनीय होते हैं। श्रावक-श्राविका को भी तीर्थ कहा गया है। श्राविका होना भी एक उपलब्धि होती है। जैन शासन में अनेक संप्रदाय हैं। अलग-अलग मान्यता, उपासना पद्धति, वंदना विधि में कुछ भेद होने के बाद भी अभेद को देखने का प्रयास करना चाहिए। जैन शासन की श्राविकाएं खुद अपनी आध्यात्मिक साधना अच्छी करें। जीवन त्याग, संयम जितना बढ सके, ज्ञान जितना बढ़ सके। अपने परिवारों को सुसंस्कारी बनाए रखने का प्रयास हो। महिलाओं का खूब अच्छा विकास होता रहे।



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