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अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का अंतिम दिन जीवन विज्ञान दिवस

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का अंतिम दिन जीवन विज्ञान दिवस के रूप में समायोजित 





अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतिम दिन उपस्थित जनता को प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि हमारे गुरुदेव आचार्यश्री तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन का शुभारम्भ किया था। उसका पचहत्तरवां वर्ष भी मना लिया गया है। आज अंतिम दिन जीवन विज्ञान दिवस के समायोजित है। यह शिक्षा जगत के लिए है। शिक्षा में ज्ञान बढे तो यह तो अच्छी बात होती ही है, इसके शिक्षा संस्कारों से युक्त हो तो बहुत ही सुन्दर बात हो सकती है। जीवन कैसे जीना, श्वास कैसे लेना, चलना, बोलना, बैठना, व्यवहार करना आदि सभी में कलात्मक रूप में हो। विद्यार्थियों में भाव और विचार अच्छे हों, इसका प्रयास हो। जीवन सादगी और संयम से युक्त हो। सद्विचार और सदाचार जीवन में आ गया तो जीवन का विज्ञान जीवन में आ सकता है। आचार्यश्री ने समुपस्थित विद्यार्थियों को सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की प्रेरणा देते हुए इनके संकल्प भी स्वीकार कराई। आचार्यश्री ने विद्यार्थियों को महाप्राण ध्वनि का प्रयोग कराया। आचार्यश्री ने समुपस्थित मुनि भव्यकीर्तिसागरजी को साधना का अच्छा क्रम चलाने की प्रेरणा प्रदान की। 

जीवन विज्ञान दिवस के संदर्भ में उपस्थित विद्यार्थियों जीवन विज्ञान गीत का संगान किया। श्री संजय बोथरा ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के सातदिवसीय कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत किया। अणुव्रत समिति-सूरत के अध्यक्ष श्री विमल लोढ़ा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। भगवान महावीर इण्टरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने अपनी विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। भगवान महावीर युनिवर्सिटि के प्रेसिडेंट श्री संजय जैन तथा अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री अविनाश नाहर ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। 

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