05.08.24, सूरत। परमाराध्य पूज्यप्रवर की पावन सन्निधि तथा जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के तत्त्वावधान में 03 अगस्त से 05 अगस्त तक आयोजित त्रिदिवसीय उपासक सेमिनार में करीब ४०० उपासक उपासिकाएं संभागी बने। त्रिदिवसीय उपासक सेमिनार का आज अंतिम दिन था। इस संदर्भ में उपासक श्रेणी के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि योगेशकुमारजी और संयोजक श्री सूर्यप्रकाश सामसुखा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। उपासक श्रेणी के सदस्यों ने गीत का सामूहिक संगान किया।
पूज्यप्रवर ने प्रसंगवश कहा- 'उपासक श्रेणी परम पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री तुलसी के समय में जन्मी हुई है। मुझे गुरुदेव तुलसी के समय इस उपासक श्रेणी से जुड़ने का मौका मिला। पहले भी शिविर लगते थे। उपासना पुस्तक के दो भाग भी सामने आए थे। उपासक श्रेणी तेरापंथी महासभा के तत्त्वावधान में है। इन वर्षों में उपासक प्रशिक्षण शिविर के संलग्न रूप में जो सेमिनार-सा होता है, इस सेमिनार में संभागियों की संख्या भी अच्छी प्रतीत हो रही है। बाहर भी कोई सेमिनार उपयुक्त लगे तो वहां भी सेमिनार की आयोजना हो सकती है। सेमिनार भी प्रशिक्षण का अच्छा माध्यम बन सकता है। उपासक उपासिकाओं में तत्त्वज्ञान का खूब विकास होता रहे। पर्युषण यात्रा एक चीज है। इसके सिवाय भी उपासक श्रेणी की धर्मसंघ के लिए उपयोगिता हो सकती है। ज्ञानशाला या अन्य स्थानों पर प्रशिक्षण देना हो, जैनिज्म, तेरापंथीज्म के बारे में प्रस्तुति करनी हो तो उपासक उपासिकाओं का अच्छा उपयोग हो सकता है। धार्मिक आध्यात्मिक संदर्भ में सार-संभाल करनी हो, कार्यशाला हो तो उपासक श्रेणी का भी यथौचित्य उपयोग हो सकता है। यह श्रेणी बहुउपयोगी सिद्ध हो सकती है। खूब अच्छा विकास होता रहे, अच्छा कम चलता रहे।'
'प्रेक्षाध्यान साधना के सूत्र' थीम पर आधारित इस सेमिनार के संभागियों को आचार्यप्रवर से पावन पाथेय प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त साध्वीप्रमुखाजी ने उन्हें उद्बोधित किया। मुनि उदितकुमारजी, मुनि दिनेशकुमारजी, मुनि कुमारश्रमणजी, मुनि योगेशकुमारजी, मुनि अभिजितकुमारजी, मुनि सिद्धकुमारजी, साध्वी योगक्षेमप्रभाजी व साध्वी अक्षयविभाजी ने मी संभागियों को प्रशिक्षण दिया। उपासक प्राध्यापक श्री डालमचन्द नौलखा, श्री निर्मलकुमार नौलखा व लेरापंथी महासभा के अंतर्गत उपासक श्रेणी के राष्ट्रीय संयोजक श्री सूर्यप्रकाश सामसुखा के भी वक्तव्य हुए।


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