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बेटी तेरापंथ की सम्मेलन द्वितीय दिवस

04.08.24, सूरत। ‘बेटी तेरापंथ की’ के द्वितीय सम्मेलन के दूसरे दिन आचार्यश्री के मंगल प्रवचन के उपरान्त मुनि कुमारश्रमणजी ने दुःख की घड़ी से सुख को निकालने की प्रेरणा प्रदान की। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि विश्रुतकुमारजी ने ‘बेटी तेरापंथ की’ प्रकल्प के संदर्भ में अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तदुपरान्त शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित संभागियों को विशेष प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि चतुर्मास के दौरान अनेक संस्थाओं के सम्मेलन होते हैं। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के द्वारा ‘बेटी तेरापंथ की’ का यह नया उन्मेष आया है। जैसा कि मैंने बताया कि बेटियों के साथ दामाद भी आए हैं, यह और भी अच्छी बात है। बेटी के दामाद और फिर दोयता व दोयती भी जुड़े होते हैं। इस सम्मेलन का दूसरा और अंतिम दिन है। बेटी व दामाद धार्मिक दृष्टि से फलते-फूलते रहें, सुखी रहें। आध्यात्मिक सुख और शांति का भाव बना रहे। जहां कहीं रहें, धार्मिक-आध्यात्मिक सेवा देने का प्रयास हो, परिवारों में शांति रहे, किसी प्रकार के कलह को अवसर न मिले, नशामुक्तता रहे। 

‘बेटी तेरापंथ की’ सम्मेलन में कच्छ-भुज से संभागी बनी बेटियों ने आचार्यश्री के समक्ष अपने गीत को प्रस्तुति दी।   

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