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प्रेक्षाध्यान सम्मेलन 2024 का हुआ आयोजन

31 जुलाई, सूरत। प्रेक्षा अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सानिध्य में द्विदिवसीय प्रेक्षाध्यान सम्मेलन का आयोजन आचार्य महाश्रमण प्रवास स्थल, सूरत में 30 और 31 जुलाई 2024 को किया गया। देश भर से लगभग 185 प्रेक्षा प्रशिक्षकों, प्रेक्षावाहिनी संवाहकों, साधकों तथा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रेक्षा सम्मेलन में प्रेक्षाध्यान की चारों संस्थाओं प्रेक्षा फाउंडेशन (JVB), प्रेक्षा इंटरनेशनल, प्रेक्षा अकादमी और अध्यात्म साधना केन्द्र की संयुक्त रूप से सहभागिता रही। 

प्रेक्षाध्यान सम्मेलन के द्विदिवसीय आयोजन का मंचीय उपक्रम रहा। इस संदर्भ में प्रेक्षा इण्टरनेशनल के अध्यक्ष श्री अरविंद संचेती, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के मुख्य न्यासी श्री केसी जैन, जैन विश्व भारती प्रेक्षा फाउण्डेशन के चेयरमेन श्री अशोक चण्डालिया व प्रेक्षा एकेडमी के अध्यक्ष श्री भैंरुलाल चोपड़ा ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। प्रेक्षाध्यान के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि कुमारश्रमणजी ने अपनी अभिव्यक्ति दी।

आचार्यप्रवर ने इस प्रसंग में कहा- 'प्रेक्षाध्यान एक आत्मकल्याणकारी, लोककल्याणकारी तत्त्व है। दूसरी दृष्टि से देखूं तो प्रेक्षाध्यान तेरापंथ से जुड़ा हुआ है। परम पूज्य गुरुदेव तुलसी के समय यह विधा प्रारम्भ हुई थी। सन् १६७५ में आचार्यश्री तुलसी का चतुर्मास जयपुर के सी-स्कीम में स्थित ग्रीन हाउस में था। संभवतः वहां प्रेक्षाध्यान का नामकरण हुआ था, ऐसी मुझे जानकारी है। हमने उस हिसाब से चिंतनपूर्वक इसी चतुर्मास के दौरान ३० सितम्बर से प्रेक्षाध्यान के ५०वें वर्ष को 'प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष' का प्रारम्भ करने का निर्णय किया।

प्रेक्षाध्यान ने भी अपनी यात्रा की। जहां जैन विश्व भारती में स्थित 'तुलसी अध्यात्म नीडम्' प्रेक्षाध्यान का मुख्य केन्द्र रहा, वहां युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी के द्वारा अनेक प्रेक्षाध्यान शिविर संचालित हुए। दिल्ली में स्थित अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के 'अध्यात्म साधना केन्द्र' में प्रेक्षाध्यान के कितने कितने शिविर हुए। वह भी प्रेक्षाध्यान का बड़ा केन्द्र है। अहमदाबाद के पास स्थित प्रेक्षा अकादमी का प्रेक्षा विश्व भारती परिसर भी प्रेक्षाध्यान का केन्द्र रहा है। प्रेक्षा इण्टरनेशनल द्वारा विदेशों में प्रेक्षाध्यान का कार्य चलता है। कितने-कितने विदेशी प्रेक्षाध्यान शिविरों में आते हैं, यह विशेष बात है। गुरुदेव तुलसी के समय में विदेशियों के आने का क्रम शुरु हो गया था। अब तक भी विदेशी लोग शिविर में आते हैं। संभवतः अब तो विदेशों में प्रेक्षाध्यान का विकास हो रहा है। बताया गया कि वियतनाम आदि स्थानों में प्रेक्षा इण्टरनेशनल के कार्यकर्ता गए थे। जैन विश्व भारती का प्रेक्षा फाउण्डेशन, प्रेक्षा इण्टरनेशनल, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास का अध्यात्म साधना केन्द्र और प्रेक्षा अकादमी प्रेक्षाध्यान की गतिविधि के ये चार कोण हैं। आचार्यप्रवर तो प्रेक्षाध्यान गतिविधि के मूल नियामक हैं। कल्याण परिषद द्वारा सौंपे गए दायित्व के अनुसार ये चारों संस्थाएं इस गतिविधि को आध्यात्मिक धार्मिक रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास करती रहें। आध्यात्मिक पर्यवेक्षक भी अपना श्रम, समय, चिंतन, दिमाग, इस गतिविधि के विकास में नियोजित करते रहें। प्रेक्षाध्यान में आज इस माने में विकास लग रहा है कि कई प्रेक्षा वाहिनियां हैं, प्रेक्षाध्यान से जुड़े हुए लोग हैं। युवा पीढ़ी से कितने लोग प्रेक्षाध्यान से जुड़े हुए हैं। हम लोग बृहत्तर मुम्बई महानगर के उपनगरों की यात्रा पर थे तो वहां प्रेक्षाध्यान के अनेक सेंटर्स में हमारा जाना हुआ। इसका अर्थ है कि प्रेक्षाथ्यान गतिविधि भी कितनी सक्रिय है। देश में भी और विदेशों में भी यह गतिविधि चल रही है। टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी यह गतिविधि आगे बढ़ रही है। जगह-जगह प्रेक्षाध्यान का प्रसार हुआ है। निर्धारित वेशभूषा देखते ही ज्ञात हो जाता है कि प्रेक्षाध्यान से जुड़े हुए लोग हैं।

परम पूज्य गुरुदेव तुलसी के समय यह कार्य प्रारम्भ हुआ। मुझे स्मृति है कि गुरुदेव प्रेक्षाध्यान शिविरों के दौरान दोपहर में जैन विश्व भारती के तुलसी अध्यात्म नीडम् में पधारते। उस समय युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी का मुख्य वक्तव्य होता, फिर गुरुदेव तुलसी का उपसंहार रूप उद्बोधन होता। गुरुदेव तुलसी के तत्त्वावधान में यह गतिविधि प्रारम्भ हुई थी। परम पूज्य आचार्यश्री महाप्रज्ञजी स्वयं ध्यान का प्रयोग करने और कराने वाले थे।

प्रेक्षाध्यान गतिविधि आज भी चल रही है। मैंने तो कहा भी है कि प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष प्रारम्भ हो जाए, उसके बाद चतुर्मास के दौरान मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में यथासंभव प्रतिदिन प्रेक्षाध्यान के प्रयोग कराए जाएं। आज प्रेक्षाध्यान सम्मेलन का प्रसंग है। प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष के संदर्भ में रूप-रेखा तैयार हुई होगी, अपेक्षानुसार और हो जाए। इस वर्ष को आध्यात्मिक-धार्मिक रूप में अच्छे ढंग से हम मना सकें व प्रेक्षाध्यान को यथौचित्य और ज्यादा आगे कदम बढ़ाने, छलांग भरने का मौका मिले। सूरत चतुर्मास में इस वर्ष का प्रारम्भ और अगले चतुर्मास में प्रेक्षा विश्व भारती में इसका समापन होना निर्धारित है। इस वर्ष यह गतिविधि और भी अच्छे रूप में आगे बढ़े, मंगलकामना। 


पूज्यप्रवर ने प्रेरणा देते हुए फरमाया कि ध्यान की  निरन्तरता, दीर्घकालिता, सत्कारिता बनी रहनी चाहिए प्रतिदिन निश्चित समय, निश्चित आसन, निश्चित स्थान हो तो ध्यान की परिपक्वता अच्छी हो सकेगी।

प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष "लोगों" पूज्य प्रवर के उपपात में अनावरण किया गया।

साध्वी प्रमुखाश्री विश्नुतविभाजी ने संभागियों को अपने आचरण तथा अपने परिवार में प्रेक्षाध्यान कैसे परिलक्षित हो इस पर चिंतन करने की प्रेरणा दी।

प्रेक्षा पर्यवेक्षक मुनिश्री कुमारश्रमण जी ने 50वीं स्वर्ण जयंती के बारे में मार्गदर्शन देते हुए करणीय कार्यों की योजना प्रस्तुत की।

प्रभावी पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से गति प्रगति की प्रस्तुति, वॉयस ऑफ विस्डम, सेशन कैसे लें, ये सभी सत्र अत्यंत प्रभावी रहे।




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